| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (102271) | |
22571. नारियल किसानों के लिए आय का नया जुगाड़, बनाई एक मिनट में पानी ठंडा करने वाली सस्ती मशीन!
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Karnataka
The Better India
|
- 1. ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई करने वाले विनोद ने एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया है, जिससे एक मिनट में ही नारियल का पानी ठंडा हो जाता है। उन्हें उनके आविष्कार के लिए दो-दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
- 2. विनोद ने नारियल को तोड़ने से लेकर उसे तुरंत ठंडा करने वाली मशीन विकसित की है, जिसका लाभ अब स्थानीय किसानों को भी मिल रहा है।
- 3. विनोद का कहना है कि उनका यह आविष्कार किसानों की आमदनी बढ़ाने में कारगर है।
- 4. विनोद नारियल आधारित खाद्य उत्पादों जैसे कि ठंडा नारियल पानी, नारियल आइसक्रीम, नारियल जेली बेचते हैं।
22572. IIT-Kharagpur researchers develop ultra-low-cost device for rapid Covid-19 detection
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
English
West Bengal
Indian Express
|
- 1. In a unique effort, researchers at IIT-Kharagpur have developed a first-of-its-kind portable rapid diagnostic device that can detect Covid-19 within an hour.
- 2. This test can be conducted for less than Rs 400 per test, after taking all components of expenses and business model into account.
- 3. The results can then be accessed from a customised smartphone application, without requiring manual interpretation.
- 4. The project received financial support from the institute in late April as Prof. V K Tewari, Director, IIT Kharagpur, decided to set up a fund to support Covid-19 related research and product development.
22573. पर्यावरण बचाने की सराहनीय पहल:मदुरैई के एक चाय बेचने वाले की कहानी, प्लास्टिक वेस्ट से बचने के लिए ग्राहकों को बिस्किट से बने कप में सर्व करते हैं चाय
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Tamil Nadu
Dainik Bhaskar
|
- 1. इस टी सेलर ने चाय सर्व करने के लिए बिस्किट से कप का इस्तेमाल किया है।
- 2. चाय देने के लिए प्लेन से लेकर चॉकलेट फ्लेवर वाले कपों की वैरायटी इस दुकान में देखी जा सकती है।
- 3. इस चाय को लोगों के बीच कितना पसंद किया जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोज 500 कप की खपत होती है। इस टी स्टॉल के मालिक विवेक सबापथी हैं।
- 4. उनकी एक कप चाय की कीमत 20 रुपए होती है। वे अपने ग्राहकों को बिस्किट वाले कप में चाय देते हैं। चाय पीने के बाद लोग ये कप भी खा लेते हैं।
22574. कमाल का किसान: पहले बनाई मक्का के दाने निकालने की मशीन और फिर मक्का से बनाया दूध
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Tamil Nadu
The Better India
|
- 1. हरियाणा में यमुनानगर के दामला गाँव में रहने वाले किसान अन्वेषक धर्मबीर कंबोज ने सालों पहले मल्टी-पर्पस प्रोसेसिंग मशीन इजाद की थी। उनकी इस मशीन से किसी भी फसल जैसे एलोवेरा,आंवला, तुलसी, आम, अमरुद आदि को प्रोसेस कर सकते हैं।
- 2. “मक्के की प्रोसेसिंग में इसके दाने निकालना सबसे मुश्किल काम है। इसलिए मैंने सबसे पहले यह मशीन बनाई, जिसकी लागत 20 हज़ार रुपये आई है। चीन में ऐसी ही मशीन ढाई लाख रुपये से ज्यादा कीमत की है।“
- 3. धर्मबीर कहते हैं कि उन्होंने मक्की का दूध बनाने की सोची। इसका आईडिया उन्हें कॉर्न स्टार्च से मिला।
- 4. वह बताते हैं कि उन्होंने एक 200 मिली की बोतल को 20 रुपये में बेचा।
22575. 600 से अधिक देशी बीज किए विकसित, 9वीं पास किसान ने तोड़े कई विश्व रिकॉर्ड।
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Uttar Pradesh
The Better India
|
- 1. जय प्रकाश सिंह अन्य किसानों की तरह ही एक सामान्य किसान हैं। इन्होंने धान की 460, गेहूं की 120 और दालों की 30 किस्में विकसित की हैं।
- 2. उनके द्वारा विकसित गेहूं के बीज की एक किस्म से 79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज होती है।
- 3. इसी तरह धान का बीज (HJPW157) जीरा की तरह दिखता है और साइज़ में काफी छोटा है। यह 130 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है और सिंचाई की भी कम जरूरत पड़ती है।
- 4. उन्होंने एक खास तरह का वुड एप्पल या बेल भी उगाए हैं। इसके एक ही गुच्छे में 8-10 फल लगते हैं। वह गरीब किसानों के लिए इसकी पैदावार बढ़ा रहे हैं।
22576. माँ की परेशानी देख इस बेटे ने बना दिया एक घंटे में 200 चपाती तैयार करने वाला रोटीमेकर
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Karnataka
The Better India
|
- 1. यह कहानी कर्नाटक के बोम्मई एन वास्तु की है, जिन्होंने एक ऐसे रोटीमेकर का निर्माण किया है जो एक घंटे में लगभग 200 चपाती तैयार करता है।
- 2. चित्रदुर्ग स्थित होसादुर्ग के रहने वाले बोम्मई एन वास्तु ने जब देखा कि उनकी मां को रोटी बनाने में दिक्कत हो रही है तो उन्होंने यह नायाब चीज बना डाली।
- 3. चलाने में बेहद आसान छह किलो की इस मशीन की लागत 15 हजार रुपये है। इसका आकार इंडक्शन स्टोव जैसा है।
22577. प्रयागराज के पीएचडी स्कॉलर ने गंगा की मिट्टी से बनाई बिजली, राष्ट्रपति कोविंद करेंगे सम्मानित
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Uttar Pradesh
The Better India
|
- 1. संगम नगरी प्रयागराज के रहने वाले एक इंजीनियरिंग शोधार्थी जितेंद्र प्रसाद ने गंगा नदी की मिट्टी से बिजली उत्पादन की तकनीकी विकसित की है।
- 2. जितेंद्र को इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा गांधीवादी यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन (ज्ञाति) अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। पिछले चार साल की कड़ी मेहनत के बाद जितेंद्र को उपलब्धि हासिल हुई है।
- 3. जितेंद्र ने बताया कि, पहले 12 वोल्ट की बैटरी को चार्ज किया और फिर इसे 230 वोट के एसी वोल्टेज में बदलकर बिजली के बल्ब को नौ घंटे तक जलाया।
- 4. इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की सेलेक्शन कमेटी में पांच पद्मश्री और दो पद्मविभूषण प्राप्त वैज्ञानिक एवं अन्य आईआईटी के प्रोफेसर थे, जिन्होंने जितेंद्र प्रसाद का साक्षात्कार लिया।
22578. 500 रुपये और एक पुरानी साइकिल, इस इनोवेशन से उठा सकते हैं भारी से भारी गमला
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Odisha
The Better India
|
- 1. जितेंद्र की पत्नी अर्चना को एक दिन गमला उठाते समय चोट आ गई थी और गमला भी टूट गया। इस घटना के बाद उन्होंने इस बारे में कुछ करने की ठानी!
- 2. जितेंद्र ने पहले सोचा कि ऐसा क्या किया जाये जिससे कि यह समस्या हल हो। फिर उन्हें साइकिल का ख्याल आया। वह एक कबाड़ी के पास गए और अपनी ज़रूरत के हिसाब से लोहे की रोड आदि लेकर आये। उन्होंने साइकिल के सिर्फ अगले हिस्से को इस काम के लिए इस्तेमाल में लिया। अगले हिस्से में ही उन्होंने लोहे की दो-तीन रोड को ऐसे लगाया जिससे कि गमला उठाने में आसानी हो।
- 3. जितेंद्र कहते हैं कि वह तरह-तरह के और भी कई इनोवेशन पर काम कर रहे हैं, जिसमें एक महत्वपूर्ण इनोवेशन उनके लिए है जो सुन नहीं सकते। उनका दवा है कि उन्होंने एक ऐसा यंत्र ईजाद किया है, जिसे दांतो के बीच में रखने के बाद कोई भी बहरा व्यक्ति सुन सकता है। उनका यह यंत्र अभी ट्रायल में है।
22579. भारत के रिसायकल मैन का कमाल, कचरे में पड़े मास्क और PPE किट्स से बना दी वाटर-प्रूफ ईंट
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Gujarat
The Better India
|
- 1. बिनीश को भारत का रीसायकल मैन कहा जाता है और कहें भी क्यों न, आखिर यह आदमी वेस्ट को फिर से इस्तेमाल करके बिल्डिंग मटेरियल बनाने में माहिर जो है।
- 2. बिनीश, बीड्रीम (BDream) नाम की कंपनी के संस्थापक हैं। वह इंडस्ट्रियल वेस्ट को सस्टेनेबल बिल्डिंग मटीरियल बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। उनका पहला इनोवेशन पेपर मिल से निकलने वाले कचरे को रीसायकल करके पी-ब्लॉक ईंट बनाना था। अब उन्होंने उसी कड़ी में कोरोना वेस्ट जैसे कि इस्तेमाल किए हुए मास्क, ग्लव्स और पीपीई किट से भी पी-ब्लाक 2.0 ईजाद किया है।
- 3. बिनीश सितंबर से यह ईंटे बनाना शुरू करेंगे और इसके लिए वह अस्पताल, स्कूल, सैलून, बस स्टॉप और अन्य सार्वजानिक स्थानों से बायोमेडिकल वेस्ट इकट्ठा करेंगे, जिसके लिए हर जगह इको-बिन रखी जाएगी। इन बिन्स में एक मार्क होगा जो इसके पूरे भरने पर आपको सूचित करेगा।
22580. इंजीनियर ने बनाई नई तकनीक, 12 घंटे में 250 किलो फल प्रोसेस कर कमा सकते हैं करोड़ों
Innovation and startups, ISRO/Defense/Water infrastructure/EV and other sectors
->
Innovations in Bharat
Hindi
Maharashtra
The Better India
|
- 1. महाराष्ट्र के नितिन खाडे की बनाई इस मशीन से आप 500 से ज़्यादा प्राकृतिक उत्पाद बना सकते हैं।
- 2. नितिन ने 2012 में अपनी फ़ूड प्रोसेसिंग कंपनी, ‘महाराष्ट्र फ़ूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजीज’ की नींव रखी। इसके ज़रिए वह अंगूर, हल्दी, मोरिंगा, मिर्च जैसी फसलों की प्रोसेसिंग करके किशमिश, हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, तरह-तरह के फलैक्स आदि बना रहे हैं।
- 3. नितिन खड़े के काम की खास बात यह है कि जिस तकनीक से वह फ़ूड प्रोसेसिंग करते हैं, उसे उन्होंने खुद तैयार किया है और इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है।
- 4. फ़ूड प्रोसेसिंग के साथ-साथ उन्होंने मशीनरी पर भी काम करना शुरू किया। वह 24 किलोग्राम की क्षमता से लेकर 250 किलोग्राम की क्षमता तक की मशीन बना रहे हैं। वह कहते हैं कि उनका सपना है कि हमारे देश के किसान खुद अपनी फसल को प्रोसेस करें और ग्राहकों तक पहुंचाए।